Sunday, June 23, 2013

जिंदा महिलाओं के हाथ काट लूट रहे थे जेवर

गौरीकुंड के पास कुछ नेपाली बदमाश महिलाओं व अन्य श्रद्धालुाओं से लूटपाट कर रहे थे। कुछ लोग शवों से कंगन निकाल रहे थे तो कुछ इंसानियत की सभी हदें पार कर जिंदा महिलाओं के हाथों को काट कर जेवरात अपने कब्जे में कर रहे थे। जो लोग नकदी व जेवरात देने में थोड़ी आनाकानी कर रहे थे, उन्हें वे पहाड़ से नीचे फेंकने की धमकी दे रहे थे। बाद में पांच बदमाशों को सेना के जवानों ने लाखों की नकदी और एक बैग जेवरात के साथ गिरफ्तार किया। यह कहना है हरियाणा के उन चार युवकों का जो आपदा के दौरान केदारनाथ की यात्रा पर थे और सेना की मदद से सकुशल घर लौटे हैं।

रोहतक के कमल वर्मा अपने तीन दोस्तों के साथ चार धाम की यात्रा पर निकले थे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में तबाही को देखकर दिल दहल गया था। चारों तरफ पड़े शवों को देखकर सोचा नहीं था कि वे जिंदा घर वापस लौट जाएंगे। गौरीकुंड व आसपास पड़े शव सड़ने लगे थे, चील और कौवे शवों को नोंच रहे थे। ऐसा मंजर उनसे देखा नहीं जा रहा था।

कमल ने बताया कि 15 जून को वे गौरीकुंड पहुंच गए थे। वहां अचानक तेज बारिश आ गई। इसलिए उन्होंने धर्मशाला में 2500 रुपये में एक कमरा किराए पर लिया। लेकिन अलसुबह ही उनको चेतावनी देकर धर्मशाला से कमरा खाली करा दिया गया। 16 जून को कुछ ऊंचाई पर उन्होंने तीन हजार रुपये में किराए पर कमरा लिया। इस बीच शाम को अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। इसकारण वहां के स्थानीय लोगों के अलावा होटलों व धर्मशालाओं में ठहरे लोग पहाड़ों की तरफ भागने लगे। देखते ही देखते वहां खड़ी इमारतें भरभरा कर पानी के सैलाब में ढहने लगीं।

Saturday, June 22, 2013

हरिद्वार में गंगा नदी से शव निकाले जाने के बारे में क्लिक करें

शुक्रवार को वहाँ के वरिष्ठ पुलिस
अधीक्षक राजीव स्वरूप ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा था कि 40 से ज़्यादा शव निकाले गए हैं. इससे पहले भी वहाँ से आठ शव निकाले जा चुके थे. एसएसपी स्वरूप ने कहा था, ''अभी नदी से शव निकाले जा रहे हैं. हम उनको रिक्वर(बरामद) कर रहे हैं. अभी तक 40 बॉडी (शव) रिक्वर की गईं हैं. कुछ-कुछ बॉडी की हालात बहुत ज़्यादा ख़राब है''
कि शवों की पहचान की कोशिश की जा रही है क्योंकि ज़्यादातर शव क्षत-विक्षत हो गए थे और उनकी पहचान मुश्किल है. उन्होंने यह भी कहा था कि पानी घटने के साथ और ज़्यादा शव मिलने की आशंका है. लेकिन शनिवार को बीबीसी से बातचीत के दौरान पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप अपने पहले दिन के बयान से बदल गए.

उत्तराखंड: बयान से पलटे हरिद्वार एसएसपी

उत्तराखंड में आई आपदा में मरने वालों की संख्या 557 हो गई है और अभी भी लगभग 40 हज़ार लोग अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं जिन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की कोशिश जारी है.
लेकिन ऐसा लगता है कि इस प्राकृतिक आपदा के शिकार होने वालों के बारे में उत्तराखंड के अधिकारी अलग-अलग बयान दे रहे हैं. मरने वालों की संख्या के बारे में भी अलग-अलग विभाग अलग-अलग आंकड़े दे रहे हैं. शनिवार को उत्तराखंड के दौरे पर गए केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी कहा कि राहत एजेंसियों में क्लिक करें तालमेल की कमी के कारण बचाव और राहत कार्यों में बाधाएं आ रही हैं. 

'मौसम बिगड़ने की आशंका'








उत्तराखण्ड के मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में राज्य में मौसम फिर बिगड़ सकता है. अगले 24 घंटे में राज्य में कई जगह बारिश और बौछारें पड़ने की आशंका है. 
मौसम विभाग के अनुसार इसका असर ख़ासतौर पर पिथौरागढ़ और लोहाघाट इलाक़े में हो सकता है.

इसके अलावा कई जगह सघन बादल और धुंध होने की संभावना है. इस वजह से हेलिकॉप्टर की उड़ानों के लिए अनुकूल स्थितियां नहीं बन पाएंगी. मौसम विभाग के निदेशक आनन्द शर्मा के अनुसार 24 से 27 जून के बीच कुमांऊ और गढ़वाल दोनों ही मंडलों में कई स्थानों पर अच्छी-ख़ासी बारिश हो सकती है. चुनौती ये है कि इसके पहले सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया जाए.

केदारनाथ पहले और बाद में


केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शनिवार सुबह को देहरादून में उत्तराखंड की आपदा से उपजे हालात की समीक्षा करने के लिए मख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ बैठक की.

शिंदे ने इसे राष्ट्रीय संकट क़रार दिया और कहा कि तालमेल न होने से ठीक से राहत का काम नहीं हो पा रहा है. उनका कहना था कि समन्वय की कमी दूर करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ़ से पूर्व गृह सचिव वीके दुग्गल को नियुक्त किया गया है और अब वही कमान संभालेंगे.

एजेंसियों में तालमेल में कोई कमी नहीं: बहुगुणा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोग उसे ग़लत संदर्भ में देखने की कोशिश कर रहे हैं.


शनिवार शाम को देहरादून में पत्रकारों से बात करते हुए बहुगुणा ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच तालमेल में कोई कमी नहीं है.

Wednesday, June 19, 2013

कहाळी बंटवारो - Story

कहाळी बंटवारो - रामसरो मोटो गांव। चौधरी रतना राम इलाकै रौ मोटो मिनख। मोटी गुवाड़ी रौ धेणी। रियासत रै बख्त सूं मिल्योड़ी लम्बरदारी। आजादी आयी। लम्बरदारी गई परी। पण लोग अर सरकारी कारुन्दा बानै लम्बर-दार साब केवै। चौधरी कनै मोकळी जमीन। अै ई कोई तीन सौ बीघा अर तीन भाई। बिचलै रौ नाम हेतराम जकौ खेती-पाती री देखभाल करै। छोटै भाई रो राम साहबराम जकौ दसवीं जमात ताई पढय़ोड़ौ। राजनीति भी करै सागै ई मण्डी जा रै खेती री निपज बेचणी अरब ठै सूं घर री जरूरत मुजब चीज बस्त खरीद ल्याणै रौ काम भी करै।
खेती रौ घणखरौ काम-पाड़, पाती, बीजणै, अनाज काढणो आद ट्रैक्टर स्यूं करै। पण चौधरी नै पुराणी रीत सारु मदुओ ऊँट राखणै रो घणौ कोड। सर्दी रे टेम मांय बाखळा में खडय़ौ ऊँट बळबळवै अर माकड़ो पीटै जद देख र चौधरी रौ जी सोरो हु ज्यावै। चौधरी सवारी करणै खातर घोड़ी भी राखै। गांव-गांतरो कर र बोअपूठौ आंवतौ तद भमलै रै ताल में पड़ती घोड़ी री टापां सूं ठा पड़ जांवतौ क चौधरी आवै है। बो करु-कारिंदा रै भरोसै ऊंट-घोड़ी नीं छोड़तौ। खुद नीरतौ अर आथण पोर रौ पाणी प्यावण सारू जोहडै़ ले ज्यांवतौ। गांव री बू-बेटियां चौधरी रो घणौ काण-कायदौ राखती। जद पाणी ल्यांवती बीनणिया सामी मिल ज्यांवती तो बै आदर देण खातर पीठ मोड़ र खड़ी हू ज्यावंती।