गौरीकुंड के पास कुछ नेपाली बदमाश महिलाओं व अन्य श्रद्धालुाओं से लूटपाट कर रहे थे। कुछ लोग शवों से कंगन निकाल रहे थे तो कुछ इंसानियत की सभी हदें पार कर जिंदा महिलाओं के हाथों को काट कर जेवरात अपने कब्जे में कर रहे थे। जो लोग नकदी व जेवरात देने में थोड़ी आनाकानी कर रहे थे, उन्हें वे पहाड़ से नीचे फेंकने की धमकी दे रहे थे। बाद में पांच बदमाशों को सेना के जवानों ने लाखों की नकदी और एक बैग जेवरात के साथ गिरफ्तार किया। यह कहना है हरियाणा के उन चार युवकों का जो आपदा के दौरान केदारनाथ की यात्रा पर थे और सेना की मदद से सकुशल घर लौटे हैं।
रोहतक के कमल वर्मा अपने तीन दोस्तों के साथ चार धाम की यात्रा पर निकले थे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में तबाही को देखकर दिल दहल गया था। चारों तरफ पड़े शवों को देखकर सोचा नहीं था कि वे जिंदा घर वापस लौट जाएंगे। गौरीकुंड व आसपास पड़े शव सड़ने लगे थे, चील और कौवे शवों को नोंच रहे थे। ऐसा मंजर उनसे देखा नहीं जा रहा था।
कमल ने बताया कि 15 जून को वे गौरीकुंड पहुंच गए थे। वहां अचानक तेज बारिश आ गई। इसलिए उन्होंने धर्मशाला में 2500 रुपये में एक कमरा किराए पर लिया। लेकिन अलसुबह ही उनको चेतावनी देकर धर्मशाला से कमरा खाली करा दिया गया। 16 जून को कुछ ऊंचाई पर उन्होंने तीन हजार रुपये में किराए पर कमरा लिया। इस बीच शाम को अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। इसकारण वहां के स्थानीय लोगों के अलावा होटलों व धर्मशालाओं में ठहरे लोग पहाड़ों की तरफ भागने लगे। देखते ही देखते वहां खड़ी इमारतें भरभरा कर पानी के सैलाब में ढहने लगीं।
रोहतक के कमल वर्मा अपने तीन दोस्तों के साथ चार धाम की यात्रा पर निकले थे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में तबाही को देखकर दिल दहल गया था। चारों तरफ पड़े शवों को देखकर सोचा नहीं था कि वे जिंदा घर वापस लौट जाएंगे। गौरीकुंड व आसपास पड़े शव सड़ने लगे थे, चील और कौवे शवों को नोंच रहे थे। ऐसा मंजर उनसे देखा नहीं जा रहा था।
कमल ने बताया कि 15 जून को वे गौरीकुंड पहुंच गए थे। वहां अचानक तेज बारिश आ गई। इसलिए उन्होंने धर्मशाला में 2500 रुपये में एक कमरा किराए पर लिया। लेकिन अलसुबह ही उनको चेतावनी देकर धर्मशाला से कमरा खाली करा दिया गया। 16 जून को कुछ ऊंचाई पर उन्होंने तीन हजार रुपये में किराए पर कमरा लिया। इस बीच शाम को अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। इसकारण वहां के स्थानीय लोगों के अलावा होटलों व धर्मशालाओं में ठहरे लोग पहाड़ों की तरफ भागने लगे। देखते ही देखते वहां खड़ी इमारतें भरभरा कर पानी के सैलाब में ढहने लगीं।