Wednesday, June 19, 2013

कहाळी बंटवारो - Story

कहाळी बंटवारो - रामसरो मोटो गांव। चौधरी रतना राम इलाकै रौ मोटो मिनख। मोटी गुवाड़ी रौ धेणी। रियासत रै बख्त सूं मिल्योड़ी लम्बरदारी। आजादी आयी। लम्बरदारी गई परी। पण लोग अर सरकारी कारुन्दा बानै लम्बर-दार साब केवै। चौधरी कनै मोकळी जमीन। अै ई कोई तीन सौ बीघा अर तीन भाई। बिचलै रौ नाम हेतराम जकौ खेती-पाती री देखभाल करै। छोटै भाई रो राम साहबराम जकौ दसवीं जमात ताई पढय़ोड़ौ। राजनीति भी करै सागै ई मण्डी जा रै खेती री निपज बेचणी अरब ठै सूं घर री जरूरत मुजब चीज बस्त खरीद ल्याणै रौ काम भी करै।
खेती रौ घणखरौ काम-पाड़, पाती, बीजणै, अनाज काढणो आद ट्रैक्टर स्यूं करै। पण चौधरी नै पुराणी रीत सारु मदुओ ऊँट राखणै रो घणौ कोड। सर्दी रे टेम मांय बाखळा में खडय़ौ ऊँट बळबळवै अर माकड़ो पीटै जद देख र चौधरी रौ जी सोरो हु ज्यावै। चौधरी सवारी करणै खातर घोड़ी भी राखै। गांव-गांतरो कर र बोअपूठौ आंवतौ तद भमलै रै ताल में पड़ती घोड़ी री टापां सूं ठा पड़ जांवतौ क चौधरी आवै है। बो करु-कारिंदा रै भरोसै ऊंट-घोड़ी नीं छोड़तौ। खुद नीरतौ अर आथण पोर रौ पाणी प्यावण सारू जोहडै़ ले ज्यांवतौ। गांव री बू-बेटियां चौधरी रो घणौ काण-कायदौ राखती। जद पाणी ल्यांवती बीनणिया सामी मिल ज्यांवती तो बै आदर देण खातर पीठ मोड़ र खड़ी हू ज्यावंती।



चौधरी रै घरै दूध-छा री कमी नहीं हीँ तीन भैंस अर पांच-छ: गायां नोहरै में हरदम बंधी रैवती। दिन उगणै सूं पैली ई बिलोवणै री आवाज उगाड़ में दूर-दूर तांई सूणीजती। भाग पाटतां रै सागै गांव री लुगायां अर टाबर लोटा, हांडी अर जग ले र छा खातर चौधरी री डयोढ़ी माथै उबा हु ज्यावतां।
आथण पोर री चौधरी री चूंतरी माथै गांव री चौपाळ जुडय़ा करती। चौधरी होको भर र मूढ़ै माथै बैठ ज्यांवतौ। सैंभांत रा लोगभी आ बैठता। हौके री कुरड़-कुरड़ रै सागै गांव-देश री सुख-दुख री बात्यां हुया करती। चौधरी गांव रा गरीब-गुरबां री घणी ख्यांत राख्या करतौ। जद कदे इलाकौ अकाळ री चपेट में आ ज्यांवतौ तद आपरी बखारी अर चारै-तूडी रै कुपां रौ मूंडौ खोल देवतों। सगळां रै सुख-दु:ख रौ सीरी हौ। जरूरतमंद मिनख उम्मीद ले र आंवता अर मूंडै पर हांसी लियां पाछा जांवताँ लोग चौधरी भरोसै आप री बेटी रौ ब्याव मांड देंता। बण जीतै जी ना-नुकर नहीं करी। आधी रात पछै तांई चौपाल लागी रैंवती। जद होको ठण्डो पड़ ज्यांवतौ तद कारु-कारिंदा खीरा अर तम्बाकू आज्यूं टेक ल्यांवता। गर्मी री टेम मांय धुणी कोनी धुकती पण सर्दी में सगळां बिचाळै धुणी घुक्या करती।
गांव में काम सारू सरकार हाकम, पटवारी, सिपाही आद आंवता तद लम्बरदार री बैठक में रुकता। जाण-पिछाण हाळा ही नहीं रा-बगता बटाऊ भी रात बासौ लेंवता। सैंग जणा नै डोळ-माणै सारु आव भगत अर रोटी-खाट मिलती।
सूरज भगवान रौ रथ जिंया धूमै बियां टेम रौ परियौ भी सरकतौ रैयौ। लम्बरदार आप री उम्र रा अस्सी ऊागण देश लिया। आंख्यां अर गोडा जबाब देग्या। अब घर में अर बारै साहब राम री चालण लागगी। बींरो राजनीति करणै रौ चस्कौ बधतौ गया। पंचायत रा चुनाव आग्या। चौधरी रे बरजतां-बरजतां बो रपंच रै चुनाव में खडय़ो हुग्यौ। बींरै सामी ठाकर जसंव त सिंह खडय़ो हो। ईं स्यूं पैली गांव री पंचायत रौ चुनाव सदीब निर्विरोध हुया करतौ। सैंग जणा भेळा होर पंच-सरपंच चुण लेंवता। सरकार कानी सूं पुरस्कान में मोटी रकम लेर गांव रै विकास में लगा देंवता।
जकी चूंतरी माथै आखै गांव री चौपाल जुडय़ा करती। गांव रै विकास री बातां हुआ करती। अबैं बठै पटका-पछाड़ी री योजना बणनै लागगी। चौधरी रै प्रभाव सूं आधै स्यूँ बतौ गांव साहब राम कानी हौँ पण गांव तौर बंटग्यौ ई। चौधरी कनै सगळी बातां पूगती जग सैंग जणां नै आ ही समझावतौं क मन मोआ ना करौ। एक दूसरै री बुराई नहीं काढ़ौ। जिकै न जनता चावैगी बो ही सरपंच गण ज्यासी। पण सुणै कुण। सगळा आप चाही करै। जिंया-जिंया चुनाव री तारीख नेड़ै आंवती गई तिंयां-तिंयां खरचै रा खाळ बिगण लागग्या। बोट पड़णै हाळी काळी रात ने दोनूं कानीं सू दारु री बातळां खुलगी। रिपिंयां रा पनाळा बैहग्या। छेवट जीत साहब री हुयी।
चुनाव रै सालेक पछै चौधरी बीमार पड़ग्यौ। घणी दवा-दारु करीजी पण सारौ नीं आयौ। एक दिन बण सगळा जणा नै भेळा कर र बोल्यौ इण दुनियां में कोई कोनी रैयौ। राम-रावण सरीका नीं रैया। सबनै एक न एक दिन जावणौ ई पड़ै। म्है तो सारो-सुखी जांऊलौ। म्हारै जी में एक बात रुकी पड़ी है जकी थानै कैयन जाऊ। बीं पर चालस्यौ तो सुख पावालाँ खानदान रौ नांव ऊँचौ रैहसी। धरती किसान री मां हुवै। मां कदै कोनी बंट सकै। बा सगळां बेटा री मां हुवै। जमीन नी होवणै सूं भूमिहीण बणज्यावै। म्हारौ कैवणौ है कै जमीन नीं बांटियौ। समय सारु भेळा नहीं रह सकौ तो कोई बात नीं पण खेती मिल र करियौ। ऊसल भले ई बांट लेइयौ। जमीन बांटण री बीमारी चाल री है। घणै टेम नैली म्हरीै कनै खेती-बाड़ी अधिकारी आयोँ आ बात म्हानै समझाई कै दोटा-छोटा जमीन रा टुकड़ा आर्थिक दुष्टि सूं लाभ प्रद नहीं हुवै। आज आपणै कनै तीन सौ बीघा जमीन है जद मोटी गुबाड़ी बाजै। आ ही जमीन म्है भाई बांटल्यां तो सौ-सौ बीघा पांती आवै। फेंरु आपणै टाबरां में बंटती जावै तो छेवट दो-छो बीघा पांती आसी। किसान सू आपणी औलाद मजदूर बण ज्यासी। आपा नै टाबरां नै पढाणा चाहीजै जकै सूं बै दूजा धन्धा कर सकै। आपणा बड़ेरा कैया करता - कै घण जाम्या ऊत जा कै घ बरस्यां। साहब राम नै खास तौर सूं ताकीद करूं क थू सरपंच है। सगळै गांव रौ ख्याल राखी। आपणै कनै आवणियै री डोळ-माजणै सारु मदद करयौ। सैंग रौ भलौ करियौ। बुरी नीं बचारियौ।
कई दिनां पछे चौधरी बियासी बरस री उमर ले देव लोक हुग्यौ। सगळे गांव दु:ख मनायौ क म्हारो रूखाळौ चल्यौ गयौ।
चौधरी री सीख घणां दिनां तांई कोनी मानी जी। गढ़ जिस्यौ मकान तीस हिस्सा में बंटग्यौ। बाखळ में दो भींता खंच र तीन हिस्सा कर दिया। खेत बी बंटग्या। जमीन बंटी जद घणी ले-दे, चक-चख हुयी। रिश्तेदार भेळा हुग्या। आपस में खींचाताण हुयी। जकौ घर सगळै इलाकै री पंचायत करया करतो अबैं दूजा लोग बीं घर री पंचायती करणै लागग्या। छेवट चौधरी रतना राम रो बेटो दुनीराम ई आपरी मां रै कैवणै सूं कम उपजाऊ अर टीबै हाळी जमीन लेवण सारु राजी हुग्यौ। जमीन कांई बंटी। मन भी बंटग्या। जकी चूंतरी माथै आखौ गांव भेळा हुयौ करतो बठै अब घर हाळा ई भेळा नीं हुवै। अबै बा सूनी पड़ी रैवै या बीं पर झावरियौ गंडकौ पडय़ौ रैवे।
कई साला पदै दुनीराम री लड़की चन्दो रौ ब्याव मंडग्यौ। सबैरे-आथण गीत-गाजै। घर गा नीं आवै। आडौसी-पडौसी जरूर आवै। इण मौके परिवार रौ बामण तेजाराम आयौ तेजाराम चौधरी रै देवलोक रै टेम ई आयौ हो। बाखळ में भींता खींची देख र उदास होग्यौ। नीं बठै घोड़ी हिन हिनावै ही अर नीमदुऔ बलबलावै हो। भींत रै घूणैं में बंधी डाग जरूर अरड़ावै ही। पंडजी सगळां भाइयां रै घरां गयौ। सैंग जणा सूं रामा स्यामा करी। हालात रौ जायजौ लियो।
आथण पोर गो रोटी जीम र बैठक में जा बैठयौ। कई ताळ तांई अकेलो ई बीड़ी फंूकतौ रैयौ। फेर माची पर आड़ौ हुग्यौ। सामली भींत माथै तस्वीर रै तळै रतना राम चौधरी री। तेजाराम सोच में पडग्यौ लोगां नै, नेतावां नै कितरा समझाया। भारत म्हारी मां है। आपणी सगळां री मां है। भेळा रैवौ। पण नेता सरीखा धर्मान्ध माणस हित री बात नीं सुणी। देख बंटग्यौ तीन हिस्सा में। लाखू माणस तवाह हुग्या। हजारुं सुहाग उजड़ग्या। घणी उथळ-पाथळ माची। देख नै बांट र्कां सुखी हुया। चौधरी भी घणा समझाया। जमीन नी बांटियौ। बींरै जांवता ही जमीन बंटी। घरबट्या। मन भी बंटग्या।
थोड़ी ताल पाछे तेजारमा कनै दुन्नीराम चिलम भर र बैठग्यौ। कई ताळ तांई घर-बार, गांव-गुवाड़ की बातां हुयी। दुन्नीराम सगळी कहाणी बंटवारै री सुणी दी। सुण र तेजारमा बोल्यौ चौधरी री बात पर थे सगळा जणां कोनी चाल्या। घर जमीन बंटग्या। सम्पत कोनी रैयौ। आ बात सैं स्ूं माड़ी हुयी। ईंट जुडय़ां भीत खड़ी हुवै। भींत पड़ी, डगळिया खिंडया। म्है थानै कहुं क ओज्यू भी भेळा हु सकौ।
म्हैं फंटयौड़ा कीकर भेळा हो सकां पडंजी । म्हारा तो मुसाण ई कोनी मिळै। दुन्ननीराम बोल्यौ।
तेजाराम पडूतर देवतां थकां बोल्यौ, थारा सगळां रा ओळ-नाळा जद अेक जिग्यां गडया है तो मुसाण भी अेक जिग्या रैहसी, थूं बड़े मिनख चौधरी रतना राम रौ बेटो, कुहावै। टूटी जेवड़ी नै फेरु जोड़। बिना गांठ लगायां बंट लगा र पाछी जोड़। चन्दो रौ ब्याव है। परिवार बिना ब्याव फूटरौ नीं लागै। चन्दौ रतनाराम री पोती नीं है, हेतराम अर साहब राम री पोती है। यूं म्हारै सागै चाल। म्हैं सारी बात कर लेस्यूं- ब्याव पर भेळा करणा म्हारै जुम्मै। म्हैं तो सगळां रौ ई साझौ बामण हूं।
कई तांळ तांई दोनूं जणां में बांथा-झोड़ हुयौ। दूजै दिन आगै पंडित तेजाराम अर लारै दुन्नीराम आप रै दोनूं काका रै घरां कानी जांवता दिस्या।

0 comments:

Post a Comment