Thursday, June 6, 2013

भरी तो •चेड़ी राजा जेवर बैठ्या।

वह अपने पिता उमर और भाई जेवर और नेवर •ो शि•ायती •रती है -

भरी तो •चेड़ी राजा जेवर बैठ्या।
भरी तो •चेड़ी राजा नेवर बैठ्या।
राम जाणै चुगली चपेली गै मांय रे
बोलै छबील दे अरज सुणो राज
अरज सुणो रे हां
राम जाणै अरज सुणो मन लाय
दिन-दिन में ओ राणी महलां मांय रेवै ओ राजा।
महलां में रहवै रै हां।।
राज जाणै सांझ पडय़े मोढां गै मांय रे
सिर गो चीर राणी मोढां गै नीचै बिछावै ओ राजा।
नीचै बिछावै रै हां।।
राज जाणै सिर पर धूणो धु•ाय रे
नौ सौ •ोठड़ी गढ़ ददरेवै गी •हिए राजा
ददरेवै गी •हिए राजा
राम जाणै लगावै •ुळी गै दाग रे हां।।
मेरी मानो राजा पीहर भिज्यादयो राणी नै
पीहर भिज्यादयो रे हां।।
राम जाणै नहीं तो देवो बनवास रे
•ोरा-•ोरा राजा •ादग मंगाया
राजा •ागद मंगया रे हां।
राम जाणै ल्यादो •लम-दवात रे।
हां लिखगे परवानो राजा
नेवर नै दियो
राजा नेवर नै दियो रे हां।
राम जाणै बाछल नै परवानो देओ जी हां-
लेगे परवानो राजा नेवर चाल्या
राजा नेवर चाल्या रे हां
राम जाणै चाल्या रे महल में जाय रे
ओ हेलो देवै ओ राजा राणी नै बुलावै
राजा राणी नै बुलावै रे हां
राम जाणै अरज सुणो रे मन लाय नी रे हां
ओ बोलै नेवर राजा, •े फरमावै तन्नै
•े फरमावै रै हां ।
बाछल राणी ! अरज सुणो मन लाय जी रे हां
तेरै भाइयां गो राणी ब्याह है मंडयो है
राणी ब्याह मंडयो है रे हां
राम जाणै तन्नै तेरै भाइयां बुलाई रे हां
ओ परवानो बांचै राणी, हिवड़ो रोवै
राणी हिवड़ा रोवै रे हां -
राम जाणै रोवै •ातर मोरज्यूं रे हां
ओ बारहां सालां गो राणी नै, लिख्यो है देसूंटो
राणी नै लिख्यो है देसूंटो रे हां
राम जाणै देसूंटो •ाटण राणी जायरे हां।।

माता बाछल अपनी दूती •े द्वारा पता लगवाती है •ि पीहर में भाइयों •ी शादी •ी बात साफ झूठी है और उसे गढ़ ददरेवा से नि•ालने •ा बहाना है। माता बाछल राजा जेवर से पीहर नहीं भेजने हेतु अनुनय-विनय •रती है, ले•िन राजा जेवर मानते नहीं है और माता बाछल •ो उन•े पीहर सिरसा भेजने •ी तैयारी •रवाते हैं -

•ाळा-धोळा राजा बैल मंगावै रे
राजा बैल मंगावै रै हां
सुणले रै बैल दिवानी
सुणले रै बैल दिवानी रे हां
बैलां नै खूब सिणगारो मेरी बैल दिवानी !
चंगी सी झूल-झूलाओ जी रे हां
गाद्दी-त•िया लगाओ
रेशम डोर घलाओ
रेशम डोर घलाओ जी रे हां
रूणझुण-रूणझुण बैल जुड़ावै रे
बाछल सिरसै नै जावै।
बारा धूणी उजाड बनखंड में रे।
बाछल रथ थमावै
रथ थमावै बाछत माता रे।
गूगाजी परचा लगावै
परचा लगावै गूगा लाडला रे
•ाळे सरप उपावै
सरप उपावै गूगा लाडला रे
धोळै •ै डं• लगावै
धोळा तडफ़ मर जावै रे
झरबर-झरबर रोवै बाछल माता रे
रौ •ै रूदन मचावै
बारह धूणी उजाड़ बनखंड में रे
मेरै भाई ना रे भतीजा
ओदर मांय बोल्या गूगा लाडला रे
सुण मेरी बाछल माता रे
मत ना रोवे मेरी बाछल माता रे
सरप मेरा उपाया
चोटी गा नाड़ा तोड़ बांधो रे
तेरा धोळा खड़्या हो जाय
नानेरै मत ना चाला थै माता
नानूड़ा नाम •ढावै।
दादी-भूआं गी गाळी देवै
पीहरां गी •ळा घट जावै।
गढ ददरेवै पाछी चालो अे माता
गूगा (गीगा) जन्म लेवैगा।
आठम गो जन्म लेऊं अे माता
नौमी गो पीर •हाऊं अे माता
परचा सीस नवावै रे
गढ़ ददेवै पाछी चालो रे माता
गोगा जन्म लेवैगा रे हां।।

माता बाछल अपनी चोटी •ी ए• डोरी तोडक़र सफेद बैल •े तांती बांधती है और क्या देखती है •ि बैल खड़ा हो जाता है। गोगाजी •े इस परचे से माता बाछल •ा हौंसला बंधता है और वह गोगा •े बताये अनुसार रथ •ो वापिस ददरेवा •ी ओर मोड़ देती है है। जब राजा जेवर •ो इस बात •ा पता चलता है •ि रानी वापिस गढ़ ददरेवा आ गई है तो वे अपने सैनि•ों •ो हुक्म देते है •ि रथ •ो धक्के दे•र वापिस ददरेवा •ी सीमा से बाहर •र आये। सेव• राजा जेवर •ो आ•र बताते हैं •ि महाराज ! जितने प्रयास •रने थे •र लिए पर रथ तो अपनी जगह से टस से मस भी नहीं हो रहा है। राजा जेवर खुद आ•र इस बात •ी परीक्षा लेते हैं तो उन्हें बड़ा आश्चर्य होता है। माता बाछल उन्हें बताती है •ि गुरू गोरखनाथ •े आशीर्वाद से उसे पुत्रवति होने •ा वरदान प्राप्त हुआ है और यह सारा •रिश्मा होने वाले पुत्र •े प्रताप स्वरूप ही है। राजा जेवर •ो अपनी गलती •ा एहसास होता है और वे रानी बाछल •ो ससम्मान वापिस महल में लाते हैं और यहीं गुरू गोरखनाथ •े वरदान स्वरूप गोगाजी •ा जन्म होता है -

जन्म होया राणै गा,
जन्म होया मैं वारी जन्म होया रे।
गूगा •ा जन्म होया रे
जनम्या रे मंडली •ा राव
जन्म होया गूगै •ा जन्म होया रे।।
अे नीं दोड़ौ-दोड़ौ रूपा बांदी मैं वारी
दोड़ौ नीं दौड़ौ अे रूपा बादिया
अे जी राजा जेवर बाळै जनम लिया जी
आपणै महलां सूं बांदी चाली मैं वारी
आपणै महलां सूं बादीं चाली मैं वारी
अे नी चली आवै ओ सुन्दर दाई गी पोळ
सोवै •ै जागै सुन्दर दाई जी ओ
अे जी दाई बाई राजा जेवर घर चालो जी ओ
राजा जेवर •ै बाळै जलम लिया जी रे हां
आंखां आंधी, जीभा तोतळी मैं वारी
•ानां सूं दाई नै सुणता नांय
हाथ-पगां सूं दाई पांगळी जी रे हां
अे नीं लंहगा पहर्या गूजरात •ा मैं वारी
ओढ़्या ओ दिखणी गा चीर
महला सूं दाई चालगी जी रे
हाथ लठोरी ले ली बास गी जी रे हां
अे नीं चली आवै बजारो-बजार
अजी रूड़ती-पड़ती दाई आयगी जी रे हां
पहली पैड़ी पर दाई पग धर्या मैं वारी-२
खुल गई हो पगलां गी टूंट-२
परचा लगावै गूगा लाडला जी रे
परचा लगावै गूगा राव।
दूजी पैड़ी पर पग धर्या मैं वारी-२
खुल गई हो मुखड़ै गी जबान-
हां रे खुल गई मुखड़ै गी जबान।
परचा लगावै गूगा लाडला रे हां।।
तीजी पैड़ी पर पग धर्या मैं वारी-२
खुल गई हो •ानां गी डाट
हां रे खुल गई •ानां गी डाट।
परचा लागवै, गूगा लाडला रे हां।।
अे नीं सोनल •रद मंगालिया दाई नै
सोनल •रद मंगाय लिया।
अे नीं लिया हो गूगै गा नाळा छील
जीे ओ गूगै •ा नाळा छील।
अे नीं नहाय लिया गूगा राणा।
नहाय लिया जी रे हां
अे नीं •ूंडै जी ओ घालो मोहर पचास-२
सोनै सपारी रिपिया डेढ़ सै जी रे हां
सखियां मंगळ गाय री मैं वारी
अे नीं महलां में बाजै सोनल थाळ
मंगलस गावै सहेलियां जी रे
दानज देइयै घर गै बामणां रे
रे दाजा दानज बामणां,
देणा जी गऊओं •ा दान-२
दानज देइयै घर •े चारणां जी रे
देणां सवरण •ा दान
दानज देइयै घर •े ढोलिया जी
देणां जी घोड़लां गा दान
अे नीं सवाई-बधाई जायर •ी हो रही जी

गोगाजी ए• जन्म होते ही पाताळ लो• में भी हलचल हो जाती है। ए• पवाड़ा देखो-

बास• राजा सोवै रै पियाळ
पदमा नागण पंखा रे ढो•ै
ओ सिर पर बाजा रे बजाया
•ाची निंदरा बास• ओझक्यो
•े मेरै मितर जगाया
•े मेरै दुस्मण रे जगाया
ना तेरै मितर रे जगाया
ना तेरै दुस्मण रे जगाया
जेवर घर बाळो रे जन्मग्या
जेवर घर लाडला रे जन्मग्या
बाळा गी बूंद रे मंगाओ
जावूं राणी सैंणै पालणियै च• ल्याऊं
नौ •ुळी नागां नै बुलवावै
संग मांय राजा बांड•ी बुलवावै
सरपां गा होम रचावै बास• राजा
हो रचावै
सरपां गा जहर रे झ•ोळ्या बास• राजा
सारा जहर रे बास• पीयग्या
बास• राजा डोळी-डोळी चाल्या
चाल्यो वो तो जेवर घर आवै
बास• राजा पोळी बड़ बैठ्या
लहरी राजा पोळी में बड़ बैठ्या
बाछल माता गूगै नै झुलावै
ओ बास• राजा दाव लगै ना
गूगा राणा परचा रे लगावै
•ाचा दूध रै उफाणै

राजा जेवर •े पुत्र रत्न •ी प्राप्ति पर चारों और खुशियां मनाई जा रही है। गुरू गोरखनाथ रमते-रमते गंगा •े मैदान •ी तरफ चल पड़ते हैं।

इन्दर बरसै बड़ चोवै
चोवै रे राणा बड़ गी डाळ
राजा सिंझयां गा भीजै महल-माळिया
भीजै रै लाल •िंवाड़
घोड़ा भीजै तंग चोवै
भीजै हरियल जीण
राणी गा भीजै पांचू •ापड़ा
छतरी गी भीजै मलमल पाग

ऐसे में गुरू गोरखनाथ अपने चेलों से •हते हैं •ि हमें गंगा •े •िनारे धूपाा नगरी में चलना है

भेख उदासी छा रही
चालांगा आपां •ागरू देस
•ांगरू गयोड़ा •ोनी बावड़ा गुरूजी
जातां नै लेवै बिलमाय
बैल बणाय हळ बायसी
मींढा •र लेसी बांध
मछन्दर जोगी घुर गया
पाछा मुड़ आया नाय
बां नै लिया बिलमाय
•ुंडी तो सोटा आण दे •णीया चेला।
चेला मेरा आवण दे भूरोड़ी भांग
झेाळी तो झंडा मेरा आवण दे
चेला मेरा आवण दे लाल लंगोट
बटुआ तो आवण दे भभूत गा रे
चेला मेरा अंग-अंग जोगी लेवै रे रमाय।
झर-झर •था मेरी आण दे
गोरख गी सेवा आपा चालस्यां।
माता मैणावत गोरख सेवियो रे
जिण तो जलम्यौ गोपीचंद राव
माता मछरा तो गोरख सेविये रे
जिण तो जलम्यो पूरणमल राव
माता बाछल गोरख सेवियो रे
जिण तो जलम्यो गोगो राव
थाळ भरायो जग मोतियां रे
राजा गोरख री सेवा जाय जी रे
आगै तो •णीया चेला मिल गया रे
•िण रै तो लागू लुळ-लुळ पांय
इतणा जोगिया में •ुण तो •हीजै मानवी
गुरू रै लागो लुळ-लुळ पांय
इतणा जोगिया में गुरू गोरख तो •हीजै मानवी
लेजा ओ राजा सत गी पांवड़ी
लेजा मेरा •वल •टार
राजा तो फें•ी पावड़ी जी
•ैरी तो लागी हाथ
फेरूं तो फें•ी पावड़ी जी
टंग गई बिरछ गी डाळ।
लाओ ओ राजा सत गी पांवड़ी
लावो मेरी •वल •टार
नहीं है सत गी पांवड़ी
नहीं है •वल •टार
इण राजा नै •णीया •ाढ़ दो
धक्का देवो दो अर चार
हट•ी बरजी ना रेवै अै राणी
लेवै अे गुरू गो परसाद।
थारै जलमसी राणी डी•री
सरियल देवो नाम •ढाय
गढ़ ददरेवै में गोगा पीर जी
जिण संग ब्याह रचाय।

सरियल खेलते-•ूदते बड़ी हो गई तो राजा सिंझ्या नै योग्यवर•ी तलाश हेतु ब्राह्मण •ो बुलाया और टी•े हेतु नारेळ दे•र रवाना •िया।

धूपा नगरी से दादा चाल भाइयो
ओहो गढ़ ददरेवै चल्या आवणा रे
दादा जोसी चाल्या मधरी चाल
पांय उठावै-उठावै दादर मोरज्यूं रे
बामण दादा •िण रा तो ल्याया रे नारेळ
•िण रै तो ल्यायो टी•ो सोवणो रे हां
भाई मेरा राजा सिंझ्या रा नारेळ
गोगै राणा गो टी•ो सोवणो रे हां
बामण दादा गोगो चरावै म्हारी गाय
अम्मां बाछल तो पीसै पीसणो रे हां
बामण दादा टी•ो तो जोड़ा नै देय
गांया-भैस्यां तो देस्यां मो•ळी रे हां
बामण दादा माया तो देस्या मो•ळी रे हां
जोड़ां भाया माया तो घरल्यो ऊंची मोट
गाय-भैंस्या राखा थारै रावळै रे हां
टी•ो तो देस्यां गोगै राव नै रे हां
बामण दादा टुरग्यो इणी घड़ी गै साथ रे
जाय पणिहारियां सूं बातां ला गियो रे हां
पणिहारियां अे ! •िण तो घरां गी पणीहारी जी
•िसै राजा गा •ुआं बावड़ी रे हां
घर-घर री पणिहारी दादा बामाणां रे
राजा झेवर गा •ुंआ बावड़ी रे हां
पणिहारिया अे राजा झेवर गो महल बताय जी
•िसी तो सैनाणी घर रै बारणै रे हां
सूरज रै साम्हीं है पोळ दादा बामणां रे
गोरख धूणो धर रे बारणै रे हां
दादो बामण टुरग्यो इणी धणी गै साथ जी
पोळी सूं बातां दादो लागियो रे हां
पोळी बीरा पोळी तो बेगी खोलो जी
दूर देसां सूं बामण आवियो रे हां
पोळी बीरा खोलो-खोलो सजड़ •िवाड़
आगळ तो खोलो बीजळ सारगी रे हां
बामण दादा •ूंची तो •ोनी म्हारै पास जी
•ोई •ूंची तो लेग्या रंग-रावळै रे हां
पोळी बीरा इतणो झूठ मत बोल रे
•ोई •ूंची तो मेली डावी जेब में रे हां
बामण दादै लियो गोगा धरमी रो नांव रे
भोगळ तो खुलग्या बीजळ सार गा रे हां
बामण दादो तो गयो- गयो •चेड़्यां मांय जी
भरी रे •चेड़ी मूजरो सामियो रे हां
बामण दादा रे •िण रा घाल्या आविया
•िसै राजा गा सिमरथ पांवणा रे हां
अम्मा बाछल राजा सिझयां गा घाल्या आविया
राजा झेवर गा सिमरथ पावणा रे हां
माता बाछल पांच मोहर सोनै गा नारेळ
हे टी•ो म्हैं ल्यायो गूगै राव गो रे हां
दादा जोसी ओ टी•ो जोड़ा नै देय
भाई तो •हीजै हो जणां रे
दादो जोसी मन में होयो रे उदास
उणी तो पगां पाछो टुर गयो रे हां
दादो जोसी पूछै जोड़ां गो घर बार
रे घर तो बतादयो राजा नेवर गा रे
दादो जोसी भीड़ी-भीड़ी गळी चाल्यो आय
साम्हीं मिलग्या गोगा लाडला रे हां
बामण दादा ! हंस-हंस पूछै गोगो धरमी बात
•ुणसी •हीजै दादा गाम थारो
•ुणसै राजा गा मंगत बामणां रे
घोड़ेवाळा धूपा नगरी •हीजे म्हारो गाय
राजा सिंझ्या रा मंगत बामणां रे हां
बामण दादा! हंस तो पूछै गोगो बात
•िस बिध तो होग्यो आवणा रे हां
घोड़े वाळा पांच मोहर सोनै गा नारेळ
हे टी•ा म्हैं ल्यायो गोगै राव •ा रे हां
बामण दादा म्हारो टी•ो म्हानै देय
थे तो पधारो रंग रावळ रे हां

दादा ब्राह्मण से गोगाजी टी•ा ले लेते हैं मगर माता बाछल •ो यह पसन्द नहीं आता। गोगाजी और माता बाछल •ा संवाद देखो-

माता मेरी उठ सवेरे जाग
गडूवा ले पाणी गा मुख धोवणा
बेटा मेरा •िस घर है मंगळाचार
•िस घर आनन्द बधावणा
माता मेरी थारै घर मंगळाचार
थारै घर आनन्द बधावणा
बेटा मेरा नेड़ै •रवादं्यू सासरवाड़
नित गा आणा नित गा जावणा रे हां
बेटा मेरा ब्याह द्यूं तन्नै दो अर च्यार
बेटा मेरा दो गौरी दो सांवळी रे
माता मेरी •ाळी नै उसियो •ाळो नाग
गौर पर पडिय़ो परमा बीजळी
माता मेरी ब्याहूं सरियल नार
हे अधसरी सी माता मेरी •ामणी
बेटा मेरा वो •हीजै •ांगरू देस
बेटा मेरा •ामणगारी बठै गी •ामणी रे हां
बेटा मेरा बळद बणागे हळ जोड़ै
रे मींढा बणागे बांधले रे हां
माता मेरी जादूगरा म्हे आप
जादूगरी तो ल्यावां •ामणी रे हां
गोगा राणा जोडै भायां गो थारै बैर
•ुण तो चढैगी थारी जान
अम्मा बाछल गुरूजी चढैगा म्हारी जान
नवलख चेला तो चालै जान में
जाहर राणा मरियो गुरू गोरखनााि
बादीलो बेटो म्हानै दे दियो रे हां
माता मेरी मत ना द्यो गुरूवां ने गाळ
गुरूजी सुणै तो देसी ओळमो
जाहर राणा •ठै वो बसै रे गुरू गोरखनाथ
•ठै तो बस नवलख चेल•ा रे
•ठै तो बसै रे जळ जोगणी
माता मेरी •जळी बना में गोरखनाथ
सिखर भूंवै •े नवलख चेल•ा रे
सिखर भूंवै रे जळ जोगणी
जाहरण राणा •ांई तो •रै गुरू गोरखनाथ
जाहर राणा •ांई तो •रै रै बावन वीर
•ांई तो •रै नवलख चेल•ा रे
•ांई तो •रै जळ जोगणी
माता मेरी धूणी तपै गुरू गोरखनाथ
अम्मा बाछल च•र तो चलावै बावन वीर
धूणी रमै नवलख चेल•ा रे
लोहीड़ो तो भख जळ जोगणी
लडला रे •ित्ता दिनां गो बैठ्या बान
•ित्ता रै दिनां गा •ां•ड़-डोरड़ा
अम्मां बाछल नौं तो दिनां गो बैठ्यो बान
दस रे दिनां गा •ां•ड़ डोरड़ा
लडला रे •ित्तो तो लागै घाण्यां गो तेल
•ित्ती रै हाटां गी हळदी राचणी
अम्मा बाछल नौ तो घाणियां गो लागै तेल
दस तो हाटा गी हळदी राचणी
लडला रे •ुण तो गूंथै फूलमाल
•ुण तो गूंथै रै सिर गा सेवरा
माता म्हारी मालण तो गूंथै फूळमाळ
भूआ रे छबीले सिर गा सेवरा
लडला म्हारा •ठै तो सोहवै फूळमाळ
•ठै तो सोहवै सिर गा सेवरा
माता म्हारी गळविच सोहवै फूलमाळ
सिर पर सोहवै सिर गा सेवारा रे हां

शादी •े माहौल •े •ारण चंहुओर उत्साह •ा वातावरण है। घर में रंग-चाव शुरू हो जाते हैं। गोगाजी बान बैठ जाते है। ए• ब्यावलो देखो -

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